- 22.06.2025
छोटे इशारों से अपनापन का पुल
हम सभी अपने जीवन में एक शांत, लेकिन दृढ़ जरूरत लिए चलते हैं—जुड़ाव की, किसी समूह से जुड़ने के भाव की—ठीक उसी तरह जैसे हमारे भीतर कहीं गहराई में एक नरम, लेकिन अटल धड़कन चलती है। यह प्यास केवल कोई काव्यात्मक रूपक नहीं है; बल्कि हमारे कल्याण के लिए यह उतनी ही जरूरी है, जितनी भोजन या सिर पर छत। जब हमें महसूस होता है कि हमसे प्यार किया जाता है, जब हमें पता होता है कि अगर हम हाथ बढ़ाएँगे तो कोई उसे थाम लेगा, तब दुनिया कुछ नरम लगने लगती है और उसकी तीखी धारें कुंद पड़ जाती हैं। ऑफिस की रसोई की गहमागहमी या बारिश भरी किसी शांत सुबह में भी देखभाल और अपनापन की यह चिंगारी फिर से भड़क उठती है, याद दिलाती है कि किसी न किसी स्तर पर हम सभी बस देखे और स्वीकारे जाना चाहते हैं।
