- 09.07.2025
सुरक्षित बंदरगाह: ज़ख़्म, हास्य और सहयोग का सफ़र
⚓ ‘सुरक्षित बंदरगाह’ उस पल से शुरू होती है जब हम स्वीकार कर लेते हैं कि हमें मदद की ज़रूरत है, ख़ासकर तब, जब घाव गहरा हो — शारीरिक या भावनात्मक। इसे एक मार्गदर्शक याद दिलाने वाला वाक्य मानें: सहायता माँगना कमज़ोरी का संकेत नहीं, बल्कि सच्ची शक्ति और सुकून का मज़बूत लंगर है।
