- 10.07.2025
मैं फिर हूँ: स्व-मूल्य की नई भोर
🔥 मैं अपने स्व-मूल्य की दहलीज़ पर खड़ी हूँ, चाहे पहले किसी ने कुछ भी कहा हो। “तुम कुछ भी नहीं हो” की प्रतिध्वनि कभी मुझे परिभाषित करती थी, लेकिन अब वह बीत चुका है। इस नरम, बिजली-सी धड़कती घड़ी में—मानो एक नया सवेरा, जो अभी-अभी जन्म लेने का साहस जुटा रहा हो—मैं खुद को याद दिलाती हूँ कि हर कंपकंपाती कण को समेटने और उसे अपनी शक्ति कहने का मुझे अधिकार है। मैं यहाँ हूँ। फिर से।
